लंकापति रावण के दशानन होने को उसके बहुमुखी ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता है I वह दसो दिशाओं का ज्ञाता था I उसे सूर्य सारथी अरुण ने ज्योतिष का ज्ञान दिया था I वह त्रिकालज था I दशग्रीव अनन्य उपासक था गुह्य विद्याओं के अधिष्ठाता भगवान शिव का I उन्ही से मिला था उसे तंत्र मन्त्र का परम ज्ञान I अपनी इन्ही दिव्य व अमोघ शक्तियों के फलस्वरूप रावण ने काल तक को बना लिया था अपना बंधक I "रावण संहिता" नामक इस ग्रन्थ में रावण की जीवनगाथा के साथ ही उन साधनाओं का भी वर्णन है
System) and honoured with the title of “Bharat Jotish Bhaskar” acquiring gold medal by Jotish Vidyapeeth
have a significant role in a horoscope
वही इनकी प्रक्रिया भी सरल -सुगम है I जटिलता न होने के कारण इनकी साधना सामान्य साधक भी कर सकता है I तंत्र शास्त्र की इस विधा में बिना किसी परिश्रम के प्राप्त होने वाली जड़ी - बूटियों एवं सामग्री के प्रयोग का भी विधान है
gives worldly pleasures and liberation both to her devotees
Autobiography of a Yogi [Hindi] Practical Palmistry Hand Reading Simplified 54 Illustrations [English] लंकापति रावण के दशानन होनेAuthor Paramhansa Yogananda , , , , , , ( ), , " "